भारतीय नई कृषि नीति

(Indian New Agricultural Policy)

 

डॉ. अर्चना सेठी1, डॉ.बी. एल. सोनेकर2

1सहायक प्राध्यापक, अर्थषास्त्र अध्ययनषाला, पं. रविषंकर शुक्ल विष्वविद्यालय रायपुर.

2प्राध्यापक, अर्थषास्त्र अध्ययनषाला, पं. रविषंकर शुक्ल विष्वविद्यालय रायपुर.

*Corresponding Author E-mail: dhanbsp@gmail.com

 

ABSTRACT:

भारत सरकार की कृषि नीति कैसी होनी चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कृषि विकास के किस चरण में हेै। इस समय सरकार को कृषि के आधुनिक साधनांें की आपूर्ति पर बल देना चाहिए। नई कृषि विधेयक सकारात्मक थे किसान अपनी उपज कहीं भी बेंच सकेंगे अभी राज्य के कानून पर निर्भर है। इन बिलों के आने से राज्य अपना कमीषन और मंडी शुल्क खो देंगे। लेकिन किसानों को डर था कि इससे सरकार द्धारा गाारंटीयुक्त न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जायेगा, जिससे उन्हें अपनी फसलों के लिए प्राप्त होने वाली कीमतें कम हो जायेगी। जिससे किसानों ने इन अधिनियमों के खिलाफ प्रदर्षन किया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी 2021 में कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी।

 

KEYWORDS: कृषि नीति, न्यूनतम समर्थन मूल्य, प्रति हेक्टेअर आय।

 


 


प्रस्तावना: -

कृषि नीति का अर्थ कृषि के सर्वांगींण विकास करने से है। कृषि नीति कृषि उत्पादन में वृद्धि एवं किसानों के जीवन स्तर को उठाने की नीति है। भारत की अधिकांष जनसंख्या कृषि में संलग्न है, लेकिन उचित नीति के अभाव में वे निम्न जीवन जीने को मजबूर हैं। उचित कृषि नीति के क्रियान्वयन से भारतीय कृषि की दषा सुधारी जा सकती है।

 

अध्ययन का उददेष्य

OBJECTIVE OF STUDY

1. भारतीय कृषि नीति का अध्ययन करना।

2. कृषि विधेयकों का अध्ययन करना।

 

इस समय सरकार को कृषि के आधुनिक साधनांें की आपूर्ति पर बल देना चाहिए। इस उददेष्य की आपूर्ति के लिए सरकार को केवल देष में उत्पादन की ब्यवस्था करनी चाहिए वरन आवष्यकतानुसार इसे देष के बाहर से आयात भी करना चाहिए। साथ ही सरकार को इनके प्रयोग करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए। जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण भी सरकार का उद्देष्य होना चाहिए। उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों वर्गाे के हितों की रक्षा होनी चाहिए।

कृषि नीति का उद्देष्य (Objectives of Agricultural Policy): कृषि नीति का उद्देष्य निम्नलिखित हैः

 

1- प्रति हेक्टेअर आय में वृद्धि (Increase in Per Capita Income): नई कृषि नीति का उद्देष्य प्रति हेक्टेअर भौतिक उत्पादन में वृद्धि के स्थान पर प्रति हेक्टेअर आय में वृद्धि करना है।

2- कृषि आगत की उत्पादकता में वृद्धि (Increase in Productivity of Agricultural Inputs): कृषि नीति का उद्देष्य कृषि आगत की उत्पादकता में वृद्धि करना है इसके लिए कृषि आगत cht] खाद, उर्वरक, सिंचाई के साधन, कीटनाषक आदि की उत्पादकता में सुधार करना है।

3- पर्यावरण सुधार (Improvement of Environment): कृषि नीति का उद्देष्य पर्यावरण में सुधार करना है।

4- नौकरषाही में नियंत्रण (Cantrol in Bureaucratic): सभी प्रकार के सहकारी एवं समाज सेवी संगठनों को स्वतंत्र रुप से कार्य करने के लिए नौकरषाही में नियंत्रण करना पडेगा।

 

कृषि नीति की मुख्य विषेषताएं (Main Characteristic ofAgricultural Policy): कृषि नीति की मुख्य विषेषताएं निम्नलिखित हैः

1- भूमि सुधार संबंधी नीति (Policy for Land Reforms): भारत में भूमि सुधार संबंधी नीति सही तरीके से लागू नहीं हुआ है। जमींदारी उन्मूलन, का तकारी सुधार, भूमि की उच्चतम सीमा लागू नहीं किया जा सका है। भूमि पर खेती करने वाला का तकार अभी भी भूस्वामी नहीं बन सका है।

 

2- कृषि मूल्य नीति (Agriculture Price Policy): भारतीय कृषि मूल्य नीति का प्रथम उद्देष्य है किसानों को आत्मनिर्भर बनाना, इसके लिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना अनिवार्य है, भारतीय कृषि मूल्य नीति का द्धितीय उद्देष्य है उपभोक्ताओं की खाद्यान्नों की कृत्रिम मूल्य वृद्धि से रक्षा करना। किसानों को उपज की उचित कीमत दिलाने कृषि मूल्य आयोग, न्यूनमत समर्थन मूल्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उचित कीमत दुकानें आदि संस्थाएं स्थापित की गई है।

 

3- कृषि अनुसंधान एवं विकास संबंधी नीति (Policy for Agricultural Research and Development): षाही कृषि आयोग की सिफारिष पर 1929 में स्थापित इम्पीरियल कृषि अनुसंधान परिषद का 1966 में पुर्नगठन कर भारतीय अनुसंधान परिषद का किया गया है। इस संस्था की सारे देष में शाखाएं है। इन संस्थाओं में नये बीज, खेती की उन्नत तकनीक, कीट से पौधों की बचाव से संबंधित शोध किया जाता है। वर्तमान में 27 कृषि विष्वविद्यलय कृषि से संबंधित शोध कार्य कर रही है।

 

4- कृषि साख नीति (Agricultural Credit Policy): सरकार की कृषि साख नीति का उद्देष्य किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराना है।बैंकों के राष्टीªयकरण के पष्चात किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त हो रही है और महाजनों के चंगुल से उन्हें निकाला जा चुका है। रिजर्व बैंक ने नाबार्ड की स्थापनाकृषि साख की सर्वोच्च संस्था के रुप में की गई है।

 

5- कृषि ब्यापार नीति (Agricultural Trade Policy): भारत सरकार कीकृषि ब्यापार नीति के दो प्रमुख अंग है प्रथम आयात प्रतिस्थापन नीति अर्थात खाद्यान्नों की आयात के स्थान पर उसका मांग के अनुसार उत्पादन करना। द्धितीय ब्यापारिक फसलों कपास, चाय, जूट, काफी आदि के निर्यात को प्रोत्साहन करना।

 

नई कृषि नीति (NewAgricultural Policy):

भारत सरकार ने 28 जुलाई 2000 को नई कृषि नीति की घोषणा की। कृषि विकास की कम दर के कारण एक नई कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई। 1990.91 से 1998.99 में खाद्यान्न उत्पादन की विकास दर 1.8 प्रतिषत थी, यह जनसंख्या वृद्धि के बराबर थी। खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता प्राप्त हो गई लेकिन भूख नहीं मिटा सके। नई कृषि नीति में अपर्याप्त पंूजी, कृषि पदार्थों के संग्रहण तथा विपणन की समस्या को कृषि विकास की धीमी गति के लिए जिम्मेदार माना गया हैं।

 

नई कृषि नीति के उद्देष्य (Objectives of NewAgricultural Policy) : नई कृषि नीति के निम्नलिखित उद्देष्य हैः

 

1- कृषि विकास दर (Agricultural Growth Rate) : नई कृषि नीति का उद्देष्य कृषि विकास दर को 2005 तक 4 प्रतिषत वार्षिक से अधिक करना है।

2- समानता के साथ विकास (Growth with Equity) : नई कृषि नीति का उद्देष्य सभी वर्गों के किसानों एवं सभी क्षेत्रों के किसानों का विकास करना है।

3- मांग प्रेरित विकास (Demand Push Development) : मांग प्रेरित विकास का तात्पर्य है कृषि विकास इतना हो कि घरेलू आवष्यकता पूरी हो सके और निर्यात से अधिकतम लाभ प्राप्त हो।

4- सतत विकास (Sustainable Development) : नई कृषि नीति का उद्देष्य देष के प्राकृतक साधनों का उचित संषोधन कर पर्यावरण को बिना क्षति पहंुचाये सतत विकास करना है।

5- कषल कृषि (Efficient Agriculture) : नई कृषि नीति का उद्देष्य देष के भूमि, पानी, मिटटी आदि का कुषल उपयोग कर कृषि का विकास करना है।

 

नई कृषि नीति की आवष्यकताः नई कृषि नीति की आवष्यकता निम्नलिखित कारणों से महसूस की गईः

1- कृषि उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि (Increase in Agriculture Production and Productivity) देष की बढती हुई आबादी के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराने हेतु कृषि उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि अनिवार्य है। इसके लिए एक वैज्ञानिक कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई।

2- भूमि का उपविभाजन एवं अपखंडन (Subdivision and Fragmentation of Land): भूमि का उपविभाजन एवं अपखंडन के कारण कृषि जोतें छोटी एवं बिखरी हुई है जिससे कृषि का उचित प्रबंध करना मुष्किल हो गया है। इसके लिए एक वैज्ञानिक कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई।

3- क्षेत्रीय असंतुलन (Regional Imbalance) : देष के जिन क्षेत्रों का विकास नहीं हुआ है जैसे पर्वतीय, सुखाग्रस्त एवं वृष्टि छाया प्रदेष का समुचित विकास करने के लिए एक वैज्ञानिक कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई।

4- सीमांत भूमि का कुषल उपयोग (Efficient use of Marginal Land) : सीमांत भूमि एवं वनों के समुचित विकास के लिएएक वैज्ञानिक कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई।

5- कृषि आदानों की आसान उपलब्धता (Easy Availability of Agricultural inputs) : कृषि आदान बीज, खाद, सिंचाई, उर्वरक आदि सभी किसानों को आसानी से उपलब्ध हो सके, इसलिए एक वैज्ञानिक कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई।

6- कमजोर वर्ग का विकास (Development of Weaker Section) : एक वैज्ञानिक कृषि नीति की आवष्यकता इसलिए महसूस की गई क्यांेकि समाज के कमजोर वर्ग आदिवासी वर्ग, फार्म पर कार्यरत महिला वर्ग एवं ग्रामीण समाज के पिछडे वर्ग को भी विकास की धारा में शामिल किया जा सके।

7- ग्रामीण बेरोजगारी (Rural Unemployment) : ग्रामीण क्षेत्र में आज भी बेरोजगारी, अर्द्धबेरोजगारी की समस्या है। इसे पषुपालन, डेयरी, मुर्गीपालन, बागवानी एवं मछलीपालन आदि द्धारा समाप्त किया जा सकता है। अतः एक वैज्ञानिक कृषि नीति की आवश्यकता महसूस की गई।

8- कृषि के अनुकूल ब्यापार की शर्तें (Favourable Terms of Trade for Agriculture) : ब्यापार की षर्तें कृषि के प्रतिकूल हैं। जिसे कृषि के अनुकूल करने के लिए नई कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई। जिससे साधनों एवं पंूजी का प्रवाह कृषि की ओर हो सके।

9- सहकारिता का विकास (Development of Co-operative) : भारतीय कृषि के विकास लिए आवष्यक है कि सहकारी संस्थाओं का विकास हो जिससे किसानों को कृषि आदान, विपणन एवं प्रसंस्करण की सुविधा प्राप्त होगी। अतः नई कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई।

10- भूमि तथा जल संसाधनों का निम्न स्तर (Degradation of Land and Water Resources) : बढते जैविक दबाव के कारण भूमि तथा जल का अत्यधिक शोषण हुआ है एवं पर्यावरण को भी क्षति हुई है अतः नई कृषि नीति की आवष्यकता महसूस की गई।

 

नई कृषि नीति की विषेषताएं (Features of New Agricultural Policy) : नई कृषि नीति कीनिम्नलिखित विषेषताएं हैः

1- नई कृषि नीति का उद्देष्य कृषि विकास दर को 2005 तक 4 प्रतिषत वार्षिक से अधिक करना है।

2- नई कृषि नीति को इन्द्रधनुषीय क्रांति कहा गया कयोंकि इससे सफेद क्रांति, नीली क्रांति, हरित क्रांति संभव होगा।

3- ठेका खेती द्धारा निजी क्षेत्र की भागीदारी बढाना है।

4- राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना को सभी फसलों एवं सभी किसानों तक पहुचाना है।

5- पौधों की नई किस्म की प्रजनन पर अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जायेगा।

6- पषुपालन, डेयरी, मुर्गीपालन, बागवानी एवं मछलीपालन की प्रोत्साहन दिया जायेगा।

7- किसानों को ऋण की उपलब्धता एवं मूल्यों के उतार चढाव से रक्षा किया जायेगा।

8- कृषि पदार्थ में पषु उत्पाद दूध, अंडा, मांस का उत्पादन बढाने एवं कृषि ऊर्जा के रुप में पषुधन की भूमिका बढाने राष्टीª पषुधन प्रजनन रणनीति तैयार करना।

9- ग्रामीण विद्युतिकरण को प्रोत्साहित करना।

 

नई कृषि नीति की ब्यूह रचना (Strategy of New Agricultural Policy) नई कृषि नीति की ब्यूह रचना निम्नलिखित हैः

1- सतत विकास की ब्यूह रचना (Strategy for Sustainable Development): सतत विकास की ब्यूह रचना के अंतर्गत निम्नलिखित उपाय किये जायेंगेः (.) कृषि भूमि का उपयोग गैर कृषि कार्यों में होने से रोकना। (.) बेकार पडी भूमि का कृषि कार्यों या वन के लिए उपयोग करना। (.) फसल गहनता को बढाना। (.) सार्वजनिक भूमि पर चारागाह एवं वन के लिए उपयोग करना। (.) सिंचाई की नई तकनीक अपनाना।

 

2- संस्थागत सुधारों संबंधी ब्यूह रचना (Strategy for Institutional Reforms): संस्थागत सुधारों संबंधी की ब्यूह रचना के अंतर्गत निम्नलिखित उपाय किये जायेंगेः (.) तकारी सुधार (.) देष में चकबंदी लागू करना (.) जोतों की उच्चतम सीमा लागू करना (.) भूमि संबंधी रिकार्ड पूरा करना।

 

3- खाद्य एवं पोषण सुरक्षा संबंधीब्यूह रचना (Strategy for Food and Nutritional Security):- खाद्य एवं पोषण सुरक्षा संबंधी ब्यूह रचनाके अंतर्गत निम्नलिखित उपाय किये जायेंगेः (.) कृषि फसलों की उत्पादन एवं उत्पादकता बढाना। (.) अधिक पोषण वाली फसलों का उत्पादन करना (.) बागवानी, पुष्पखेती, औषधी पौधो के उत्पादन को बढाना (.) डेयरी, पषुपालन, मुर्गीपालन आदि को प्रोत्साहन देना।

 

4- जोखिम प्रबंध संबंधी ब्यूह रचना (Strategy for Risk Management): जोखिम प्रबंध संबंधी ब्यूह रचनाके अंतर्गत निम्नलिखित उपाय किये जायेंगेः (.) राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना को पूरे देष में लागू करना (.) बीमा योजना सभी किसानों एवं सभी फसलों पर लागू की जायेगी।

 

5- कृषि निवेष संबंधी ब्यूह रचना (Strategy for Agricultural Investment): कृषि निवेष संबंधी ब्यूह रचना के अंतर्गत निम्नलिखित उपाय किये जायेंगेः (.) सरकार द्धारा कृषि निवेष करके आथर््िाक असमानता को दूर करना (.) निजी निवेष को कृषि अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित करना

 

6- उत्पादन तकनीक के सृजनसंबंधी ब्यूह रचना (Strategy for Generation of Production Technology): उत्पादन तकनीक के सृजन संबंधी ब्यूह रचना के अंतर्गत निम्नलिखित उपाय किये जायेंगेः जैव तकनीक, ऊर्जा बचाने संबंधी तकनीक, पर्यावरण सुरक्षा संबंधी तकनीक का सृजन एवं विकास।

 

7- कृषि प्रेरणा संबंधी ब्यूह रचना (Strategy for Agricultural Incentive): कृषि प्रेरणा संबंधी ब्यूह रचना के अंतर्गत निम्नलिखित उपाय किये जायेंगे। (.) कृषि क्षेत्र की ब्यापार शर्तों में संुधार (.) विष्वब्यापार संगठन की समझौते के अनुसार आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध हटाने से किसानों को होने वाली हानि से बचाना (.) कृषि उत्पादों को टैरिफ संरक्षण प्रदान करना

 

नई कृषि नीति का मूल्यांकन (Evaluation for New Agricultural Policy):

नई कृषि नीति का मूल्यांकन निम्नलिखित बिंदुओं पर किया जाता हैः

1- छोटे किसानों की अवहेलना (Neglect of Small Farmers): नई कृषि नीति में निजी निवेष के द्धारा कृषि यंत्रों पर निवेष किया जाना छोटे किसानों के हितों कीअवहेलना है क्योंकि बडे किसान सक्षम है लेकिन छोटे किसानों के लिए इस प्रकार का निवेष संभव नहीं है।

 

2- अति आषावादी (Highly Optimistic): आलोचकों के अनुसार नई कृषि नीति अति आषावादी है। 4 प्रतिषत वार्षिक की दर से कृषि विकास कल्पना है। 90 के दषक में कृषि में विषेष परिवर्तन नहीं हुआ। आर्थिक सुधारों में कृषि की उपेक्षा इसकी पुष्टि करता है।

 

3- बेजोरगारी में वृद्धि (Increase in Unemployment): नई कृषि नीति में ठेका खेती एवं भूमि पटटा का सुझााव दिया गया है। परिणामस्वरुप बडी बडी कंपनी कृषि में प्रवेष करेंगे तथा मषीनों का अधिकाधिक प्रयोग होगा। जिससे बेरोजगारी बढेगी।

 

4- कार्यकरण तंत्र की उपेक्षा (Neglect of Implementation Mechanism): 4 प्रतिषत वार्षिक की दर से कृषि विकास नई कृषि नीति की ब्यूह रचना है। लेकिन उन उपायों को नहीं बताया गया है जिसके द्धारा इसे हासिल किया जा सके।

 

5- पिछडे राज्यों की पहचान में असफल (Failure to Indentify Agricultural Backward States);  नई कृषि नीति में समानता के साथ विकास की बात कही गई हैं अर्थात देष के सभी क्षेत्रों का विकास करना है लेकिन उन राज्यों की पहचान नहीं की गई है जो अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर रहे है। उचित होता यदि ऐसे राज्यों की पहचान कर उनके विकास के लिए विषेष पैकेज तैयार किया जाता।

 

भारतीय कृषि अधिनियम 2020

भारतीय कृषि अधिनियम 2020 जिसे फार्म बिल कहा जाता है। सितंबर 2020 में भारतीय संसद द्धारा शुरु किये गए 3 अधिनियम थे। लोक सभा ने 17 सितंबर 2020 और राज्य सभा ने 20 सितंबर 2020 को बिलों मंजूरी दी। राष्ट्रपति ने 27 सितंबर 2020 को अपनी अनुमति दी।

 

तीनों अधिनियम किसानों और ब्याापारियों के लिए एक पारिास्थतिकी तंत्र के निर्माण के लिए कृषि समझौतों पर एक राष्ट्रीय ढांचे के लिए और आवष्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संषोधन करने के लिए अवसर प्रदान किया था।

1. किसानों का उत्पादन, ब्यापार और वाणिज्य विधेयक 2020: राज्यें पंजीकृत लाइसेंसधारी ही बाहर उपज बेंच सकते थे। कानूनों ने सरकार द्धारा संचालित थोक बाजारों की एक प्रणाली को नियंत्रित कर दिया होता, जिससे किसान खाद्य सीधे प्रोसेसर को बेच सकते थे। वर्तमान विधेयक में ऐसा वातावरण कि किसान, ब्यापारी बिक्री खरीद के लिए स्वतंत्र हो जायेंगें।

 

2. मूल्य आष्वासन और कृषि सेवा विधेयक 2020 इससे किसान विपणन में प्रत्यक्ष रुप से शामिल हो जायेंगे। मध्यस्थ या बिचौलिये समाप्त हो जायेंगें। नई राष्ट्रीय कृषि समझौता प्रणाली प्रदान करने का प्रयास है जिससे थोक, खुदरा विक्रेता पारदर्षी रुप से बात कर सके।

 

3. आवष्यक वस्तु संषोधन विधेयक 2020: कोल्ड स्टोरेज, गोदान निर्यात सेवाओं की कमी के कारण किसान बेहतर मूल्य प्राप्त करने में असमर्थ थे। जल्दी खराब होने वाली फसल में अधिक हानि होती है। नई कृषि विधेयक का उद्देष्य कुछ वस्तुओं को आवष्यक वस्तुओं की सूची से बाहर करना है। अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, आलू आदि।

 

निष्कर्ष

नई कृषि विधेयक सकारात्मक थे किसान अपनी उपज कहीं भी बेंच सकेंगे अभी राज्य के कानून पर निर्भर है। इन बिलों के आने से राज्य अपना कमीषन और मंडी शुल्क खो देंगे। लेकिन किसानों को डर था कि इससे सरकार द्धारा गाारंटीयुक्त न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जायेगा, जिससे उन्हें अपनी फसलों के लिए प्राप्त होने वाली कीमतें कम हो जायेगी। जिससे किसानों ने इन अधिनियमों के खिलाफ प्रदर्षन किया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी 2021 में कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी। 19 नवंबर 2021 को केंद्र सरकार ने विधेयकों को निरस्त करने का निर्णय लिया और संसद के दोनों सदनों ने 29 नवंबर को कृषि कानून निरसन विधेयक 2021 पारित किया। किसान संधों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग जारी रखी और सरकार को 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की लक्ष्य याद दिलाई।

 

संदर्भ

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2.      Ahluwalia, M.S. (1978), Rural Poverty and Agricultural Performance in India, Journal of Development Studies.Vol.14(3):298-323.

3.      Dev, S. Mahendra, Kirit S Parikh and M.H. Suryanrayana (1991), Rural Poverty in India: Incidence, Issues and Policies, Discssion paper no. 55, June, Indira Gandhi Institute of Development Research, Bombay.

4.      Gulati, Ashok (1992), Rapporteur’s Report on Agriculture Policy in the Light of New Trade and Industrial Policy, IJAE, 47(3), July-September.

5.      Singh, R.I.: V Prasad and S.M. Dhingar (1992), Indian agricultural Policy in the Context of New Trade and Industrial Policy, IJAE, 47(3), July-September, pp.357-362.

6.      Venkataramanan, L.S. (1979), Foodgrains Growth and Price Policy in C.H. Shahd (ed.) Agricultural Development in India: Policy and Problems, Orient Longman, Bombay.

 

 

 

Received on 22.09.2023        Modified on 24.10.2023

Accepted on 22.11.2023        © A&V Publication all right reserved

Int. J. Ad. Social Sciences. 2023; 11(4):240-245.

DOI: 10.52711/2454-2679.2023.00039